
प्रोस्टेट पुरुषों के शरीर में मौजूद एक छोटी ग्रंथि होती है, जो उम्र बढ़ने के साथ बड़ी हो सकती है। यह मूत्राशय के नीचे होती है और वीर्य (सीमन) बनाने में मदद करती है। जब इस ग्रंथि की कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं, तो इसे प्रोस्टेट कैंसर कहा जाता है। यह कैंसर धीरे-धीरे बढ़ता है, लेकिन समय पर इलाज न होने पर शरीर के अन्य हिस्सों, खासकर हड्डियों तक फैल सकता है।
भारत में प्रोस्टेट कैंसर पुरुषों में तीसरा सबसे आम कैंसर है और यह ज्यादातर 50 साल से अधिक उम्र के पुरुषों में पाया जाता है।
प्रोस्टेट कैंसर के 5 मुख्य कारण
- उम्र बढ़ना: प्रोस्टेट कैंसर का सबसे बड़ा जोखिम उम्र है। 50 साल के बाद इसका खतरा तेजी से बढ़ जाता है और 65 साल से अधिक उम्र के पुरुषों में यह ज्यादा पाया जाता है।
- परिवार में इतिहास (जेनेटिक कारण): अगर पिता या भाई को प्रोस्टेट कैंसर है, तो इसका खतरा काफी बढ़ जाता है। यह बीमारी अक्सर परिवार में चलती है और कुछ जीन बदलाव इसके लिए जिम्मेदार होते हैं।
- मोटापा: जिन लोगों का वजन ज्यादा होता है (BMI 30 से ऊपर), उनमें प्रोस्टेट कैंसर का खतरा ज्यादा और अधिक गंभीर हो सकता है। शरीर में ज्यादा चर्बी हार्मोन और मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करती है।
- खराब खानपान और जीवनशैली: ज्यादा फैट वाला खाना, कम फल-सब्जियां, फास्ट फूड और कम शारीरिक गतिविधि इस बीमारी का खतरा बढ़ाते हैं। बदलती लाइफस्टाइल इसका बड़ा कारण बन रही है।
- धूम्रपान: स्मोकिंग शरीर की हर कोशिका को नुकसान पहुंचाती है और प्रोस्टेट कैंसर का जोखिम भी बढ़ा सकती है।
प्रोस्टेट कैंसर के लक्षण और असर
प्रोस्टेट कैंसर की शुरुआती अवस्था में लक्षण नहीं दिखते, लेकिन बढ़ने पर ये समस्याएं हो सकती हैं:
- पेशाब करने में दिक्कत या बार-बार पेशाब आना, खासकर रात में
- पेशाब या वीर्य में खून आना
- पेशाब के दौरान जलन या दर्द
- यौन संबंध बनाने में समस्या (इरेक्टाइल डिसफंक्शन)
- हड्डियों, कमर या शरीर के अन्य हिस्सों में दर्द
- पैरों में कमजोरी या सुन्नपन
- गंभीर स्थिति में ब्लैडर और आंतों पर नियंत्रण कम होना
कब कराएं जांच?
अगर ऐसे लक्षण दिखें तो तुरंत जांच कराएं। इसके लिए दो मुख्य टेस्ट होते हैं:
- PSA (ब्लड टेस्ट), जो प्रोस्टेट से जुड़े बदलाव को दिखाता है
- डिजिटल रेक्टल एग्जाम (डॉक्टर द्वारा जांच)
50 साल से ऊपर के पुरुषों को साल में एक बार यह जांच करानी चाहिए।
प्रोस्टेट कैंसर का इलाज
इलाज कैंसर की स्टेज पर निर्भर करता है:
- शुरुआती स्टेज (Localized): इस स्थिति में तुरंत इलाज जरूरी नहीं होता। डॉक्टर निगरानी (Active Surveillance) रखते हैं और समय-समय पर जांच करते हैं।
- लोकली एडवांस स्टेज: इस अवस्था में सर्जरी (प्रोस्टेटेक्टॉमी), रेडिएशन थेरेपी या हार्मोन थेरेपी की जरूरत पड़ सकती है।
- मेटास्टेटिक स्टेज (फैल चुका कैंसर): जब कैंसर शरीर के अन्य हिस्सों, खासकर हड्डियों में फैल जाता है, तब दवाओं, रेडिएशन और हार्मोन थेरेपी से इसे नियंत्रित किया जाता है।
निष्कर्ष
प्रोस्टेट कैंसर एक गंभीर लेकिन धीमी गति से बढ़ने वाली बीमारी है। समय पर जांच, सही खानपान, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इसके खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। 50 साल के बाद नियमित जांच कराना बेहद जरूरी है, ताकि बीमारी को शुरुआती चरण में ही पकड़ा जा सके।
