
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार (24 मार्च 2026) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं के बीच यह बातचीत ऐसे समय हुई है जब अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध जारी है और इसका असर पूरी दुनिया, खासकर ऊर्जा बाजार पर पड़ रहा है।
28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद यह पहली बार है जब ट्रंप और मोदी के बीच सीधी बातचीत हुई। इस संघर्ष में अब तक पश्चिम एशिया में कम से कम 6 भारतीयों की मौत हो चुकी है और हॉर्मुज जलडमरूमध्य से तेल-गैस की आवाजाही भी प्रभावित हुई है।
प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत के बाद कहा कि भारत जल्द से जल्द शांति बहाली और तनाव कम करने का समर्थन करता है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य का खुला, सुरक्षित और सुगम रहना पूरी दुनिया के लिए बेहद जरूरी है।
दरअसल, हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और गैस की बड़ी मात्रा गुजरती है। युद्ध के कारण यहां से सप्लाई प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उछाल आया है और भारत जैसे देशों में LPG की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है।
अमेरिका के भारत में राजदूत सर्जियो गोर ने भी इस बातचीत की पुष्टि करते हुए कहा कि दोनों नेताओं ने मध्य पूर्व की स्थिति और हॉर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने की अहमियत पर चर्चा की।
इस बीच, भारत लगातार कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय है। प्रधानमंत्री मोदी ने हाल के दिनों में ईरान के राष्ट्रपति से भी बातचीत की है और समुद्री रास्तों की सुरक्षा पर जोर दिया है। वहीं विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी अमेरिका, ईरान और खाड़ी देशों के प्रतिनिधियों से संपर्क बनाए रखा है।
युद्ध के चलते वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है। ऐसे में अमेरिका ने रूस से तेल खरीद पर लगे कुछ प्रतिबंधों में ढील दी है, जिसके बाद भारत ने फिर से रूसी तेल खरीदना शुरू कर दिया है। भारत सरकार ने इसे सामान्य व्यापारिक प्रक्रिया बताया है।
कुल मिलाकर, यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब पूरी दुनिया की नजरें इस युद्ध और उसके असर पर टिकी हैं, और भारत कूटनीतिक संतुलन बनाते हुए अपने ऊर्जा हितों को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहा है।

