
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 इस बार बेहद दिलचस्प और टक्कर वाला माना जा रहा है। 23 और 29 अप्रैल को होने वाले इस चुनाव में मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच है, जबकि कांग्रेस और वाम दल इस बार हाशिये पर नजर आ रहे हैं।
तीन बार से सत्ता में काबिज TMC इस बार एंटी-इंकम्बेंसी यानी सत्ता विरोधी माहौल से जूझ रही है। इसे कम करने के लिए पार्टी ने बड़ा कदम उठाते हुए 74 मौजूदा विधायकों के टिकट काट दिए और नए चेहरों को मौका दिया है।
2021 के चुनाव में TMC ने 215 सीटों के साथ 48.02% वोट शेयर हासिल किया था, जबकि BJP ने 77 सीटें और 38% वोट शेयर के साथ मजबूत प्रदर्शन किया था। 2016 में BJP के पास सिर्फ 3 सीटें थीं, ऐसे में उसका उभार काफी तेज रहा है।
इस बार मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का सीधा मुकाबला BJP नेता और विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी से है। खास बात यह है कि 2021 में नंदीग्राम सीट पर ममता बनर्जी को सुवेंदु अधिकारी से हार का सामना करना पड़ा था, हालांकि TMC ने सरकार बना ली थी।
वोटर लिस्ट विवाद ने बदला खेल
इस चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा बना है स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR)। 28 फरवरी को जारी अंतिम वोटर लिस्ट में कुल मतदाताओं की संख्या 7.66 करोड़ से घटकर 7.04 करोड़ रह गई, यानी 62 लाख से ज्यादा नाम हटा दिए गए। इसके अलावा करीब 60 लाख नाम अभी भी जांच के अधीन हैं, जिससे स्थिति और अनिश्चित हो गई है।
यह विवाद पूरे चुनावी माहौल पर भारी पड़ रहा है। ममता बनर्जी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाते हुए BJP पर आरोप लगा रही हैं कि वह बंगाल और यहां के मतदाताओं के खिलाफ काम कर रही है।
BJP की चुनौती और सीमाएं
BJP के पास इस चुनाव में कुछ मजबूत मुद्दे थे, जैसे 2024 में कोलकाता में एक ट्रेनी डॉक्टर के साथ हुई दुष्कर्म और हत्या की घटना, जिसने राज्य सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाया था। लेकिन पार्टी की सबसे बड़ी चुनौती राज्य की सांस्कृतिक और भाषाई विविधता को साधने में रही है।
साथ ही, BJP की राज्य इकाई में अंदरूनी मतभेद भी सामने आ रहे हैं, जिससे उसकी रणनीति कमजोर पड़ती दिख रही है।
बाकी दलों की भूमिका
कांग्रेस इस बार बिना किसी गठबंधन के चुनाव लड़ रही है, जबकि वाम दल सीधे मुकाबले में नहीं हैं। हालांकि, कुछ सीटों पर उनका वोट शेयर मुकाबले का समीकरण बिगाड़ सकता है।
क्या कहता है माहौल?
जहां एक तरफ TMC अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखने की कोशिश कर रही है, वहीं BJP इस बार सत्ता में आने के लिए पूरा जोर लगा रही है। दोनों पार्टियों के लिए यह चुनाव “करो या मरो” जैसा बन गया है।
लंबे चुनावी अभियान के बीच अभी भी कई मोड़ आ सकते हैं, लेकिन इतना तय है कि बंगाल की यह लड़ाई बेहद रोमांचक और निर्णायक होने वाली है।
