
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के “सकारात्मक बातचीत” के दावे को ईरान ने सिरे से खारिज कर दिया है। ईरान के वरिष्ठ नेताओं ने साफ कहा है कि अमेरिका के साथ किसी भी तरह की बातचीत नहीं हुई है।
ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर ग़ालिबाफ ने सोमवार को बयान देते हुए कहा कि “अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं हुई है।” उन्होंने ट्रंप के दावे को “फेक न्यूज” बताते हुए आरोप लगाया कि अमेरिका और इजरायल अपनी मुश्किल स्थिति से निकलने के लिए ऐसी बातें फैला रहे हैं।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने भी यही बात दोहराई। उन्होंने कहा कि कुछ मित्र देशों के जरिए अमेरिका की ओर से बातचीत का संदेश जरूर मिला है, लेकिन सीधी बातचीत नहीं हुई है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध चौथे हफ्ते में पहुंच चुका है। सोमवार को इजरायल ने एक बार फिर तेहरान पर हमले किए, जिससे तनाव और बढ़ गया है।
इस बीच ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई जारी रखते हुए मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं और हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लगभग बंद कर दिया है, जो दुनिया के तेल और गैस आपूर्ति का अहम रास्ता है। इससे वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में तेजी आ गई है और चिंता बढ़ गई है।
ट्रंप ने इससे पहले धमकी दी थी कि अगर ईरान ने 48 घंटे के अंदर हॉर्मुज जलडमरूमध्य नहीं खोला, तो अमेरिका ईरान के बिजली संयंत्रों को तबाह कर देगा। हालांकि बाद में उन्होंने कहा कि बातचीत के चलते 5 दिनों के लिए हमले टाल दिए गए हैं।
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिका ने ईरान के “एक बड़े अधिकारी” से बातचीत की है, हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं बताया। उन्होंने कहा कि “दोनों देश समझौता करना चाहते हैं।”
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप बातचीत की बात कहकर अपने पहले दिए अल्टीमेटम से पीछे हटने की कोशिश कर रहे हैं। तेहरान यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर हसन अहमदियन के अनुसार, पाकिस्तान, मिस्र और तुर्किये जैसे देश दोनों पक्षों के बीच तनाव कम करने की कोशिश कर रहे हैं।
फिलहाल जमीन पर हालात बेहद तनावपूर्ण हैं और यह साफ नहीं है कि बातचीत की कोई ठोस शुरुआत कब और कैसे होगी।
